18 नवंबर 2018 - 13:24
ख़ाशुक़जी हत्या मामले को समाप्त करने के लिए क्या अमरीका, गोलन को तुर्की के हवाले कर देगा?

प्रख्यात अरबी समाचारपत्र रायुल यौम ने लिखा है कि वाॅशिंग्टन, सरकार विरोधी सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले को ठंडे बस्ते में डालने के बदले में फ़त्हुल्लाह गोलन को अन्कारा के हवाले करने की समीक्षा कर रहा है।

रायुल यौम ने अपने संपादकीय में लिखा है कि वाॅशिंग्टन क्षेत्र में अपने घटकों और विशेष रूप से मुख्य मोहरे यानी मुहम्मद बिन सलमान को बचाने की अपनी रणनीति के अंतर्गत तुर्की के सरकार विरोधी प्रचारक फ़त्हलुल्लाह गोलन को अन्कारा के हवाले करके उससे मांग कर सकता है कि वह ख़ाशुक़जी मामले को बंद कर दे। पत्र के अनुसार तुर्की और अमरीका के संबंधों और उनमें आजकल आने वाले परिवर्तनों को समझना बहुत मुश्किल है क्योंकि ख़ाशुक़जी हत्याकांड के बारे में दोनों देशों के निकट समन्वय और तुर्की के रुख़ की ओर अमरीकी अधिकारियों के झुकाव के बावजूद तुर्की के युद्धक विमानों ने पूर्वी फ़ुरात के क्षेत्र में अमरीका समर्थित कुर्दों के ठिकानों पर बमबारी की है। तो इस विरोधाभास को कैसे समझा जा सकता है?

 

संपादकीय में लिखा है कि काश बात केवल इतनी ही जटिल होती। शुक्रवार को अमरीका के एनबीसी टीवी चैनल ने अचानक ही एक रिपोर्ट प्रसारित करके सभी को चौंका दिया और इस रिपोर्ट ने अनेक प्रश्न खड़े कर दिए। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि वाॅशिंग्टन, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान की ख़ुश करने और ख़ाशुक़जी हत्याकांड में सौदेबाज़ी के लिए फ़त्हुल्लाह गोलन को तुर्की के अधिकारियों के हवाले करने के संबंध में क़ानूनी मार्गों की समीक्षा कर रहा है। ज्ञात रहे कि गोलन और उनका धड़ा तुर्की में विफल सैन्य विद्रोह का मुख्य आरोपी है। इस ख़बर पर तुर्की व अन्य देशों ने व्यापक प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं क्योंकि इससे तुर्क अधिकारियों द्वारा अमरीकी पादरी एंड्रू ब्रंसन की रिहाई की याद ताज़ा हो गई हालांकि तुर्की ने ब्रंसन की ओर से आतंकी गुटों के समर्थन का दावा किया था। कुछ ख़बरों से तो यह भी संकेत मिल रहा था कि अमरीकी पादरी को इस लिए गिरफ़्तार किया गया था ताकि उसका और गोलन का आदान-प्रदान किया जा सके।

 

तुर्की अब भी ख़ाशुक़जी हत्याकांड में अंतर्राष्ट्रीय जांच की मांग कर रहा है और उसने इस मामले में सऊदी अरब की ओर से पेश की जाने वाली हर कहानी को रद्द किया है। सऊदी अरब केवल पांच लोगों को ख़ाशुक़जी की हत्या के लिए ज़िम्मेदार मानता है जिनमें सबसे अहम सऊदी अरब के गुप्तचर विभाग का उप प्रमुख अहमद अलअसीरी है। रियाज़ का कहना है कि असीरी ने ही ख़ाशुक़जी की हत्या का आदेश दिया था और इस मामले से युवराज मुहम्मद बिन सलमान का कोई लेना-देना नहीं है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री आदिल अलजुबैर ने शुक्रवार को एक पत्रकार सम्मेलन में इस बात की पुष्टि की।

 

न्यूयाॅर्क टाइम्ज़ ने भी हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के समय की तीन आॅडियो फ़ाइल्ज़ के हवाले से इस मामले में कुछ नई बातों का रहस्योद्घाटन किया। पत्र के सूत्रों के अनुसार इस्तंबोल में सऊदी कोन्सलेट में ख़ाशुक़जी की हत्या के तुरंत बाद उनकी हत्या करने वाली टीम के एक सदस्य ने अपने सेटेलाइट फ़ोन से अपने अधिकारी से कहा था कि अपने बाॅस (संभावित रूप से मुहम्मद बिन सलमान) से कह दो कि अभियान पूरा हो गया। न्यूयाॅर्क टाइम्ज़ की रिपोर्ट के अनुसार यह आॅडियो फ़ाइल, जिसे सीआईए प्रमुख जीना हेस्पल भी सुन चुकी हैं, ख़ाशुक़जी हत्याकांड में मुहम्मद बिन सलमान के लिप्त होने का अत्यंत ठोस प्रमाण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि इस फ़ाइल में मुहम्मद बिन सलमान का नाम नहीं लिया गया है लेकिन अमरीका के गुप्तचर अधिकारियों का कहना है कि इसमें "बाॅस" से तात्पर्य मुहम्मद बिन सलमान से ही है।

 

सऊदी शासन ने इस्तंबोल में अपने कोन्सलेट में  ख़ाशुक़जी की हत्या की बात को मान लिया है लेकिन उसने इसका आरोप अपनी मर्ज़ी से काम करने वाले तत्वों पर डाला है। अब देखना यह है किअमरीका, मध्यपूर्व में अपने मुख्य मोहरे मुहम्मद बिन सलमान को निर्दोष सिद्ध करने के लिए क्या क़दम उठाता है?